28.9.07

एक्युप्रेशर

शरीर के सभी अंग परस्पर अंतर्संबंधित होते हैं, इसी सिद्धान्त पर एक्युप्रेशर कार्य करता है। हाथ और पैर के तलवों के हिस्सों में सभी अंगों के प्रतीक छिपे रहते हैं। इनके उत्तेजित किये जाने पर ये रोग निवारण के असरदार बिंदु साबित होते हैं। इन संबंधित बिन्दुओं पर उचित दबाव डाल कर आरोग्य प्राप्त किया जा सकता है।

संक्षेप में इनके महत्वपूर्ण्‍संबंधित बिन्दु इस प्रकार हैं। इन बिन्दुओं के दबाने से मिलने वाले लाभ को भी संकेतिक कर रहा हूँ।

1. हाथों की उंगलियों के पहले पोरों के बिन्दुओं (नाखूनों के पास वालों) को दबाने से साइनस में लाभ मिलता है।

2. अंगूठे का पहला पोर मस्तिष्क से संबंधित होता है। (एकदम आगे वाला नाखूनों के पास वाला भाग) इसके बाद वाला भा्ग पिट्यूटरी ग्रंथि को उत्तेजित करने में समर्थ है। पिट्यूटरी ग्रंथि से संबंधित बीमारियाँ इसके दबाने से ठीक हो जाती हैं ।

3. तर्जनी और मध्यमा (अंगूठे से दूसरी और तीसरी उंगलियाँ) के मूल का मध्य भाग आँखों के रोगों से संबंधित है। यह आँखों के रोगों से मुक्ति देने में बहुत प्रभावी है।

4. अनामिका और कनिष्ठा के मूलों के बीच में कान का नियंत्रण होता है। इसे दबाने से कानों से सं‍बंधित सभी रोगों में लाभ्‍होता है।

5. इसी प्रकार अंगूठे के बाहरी भाग से लेकर कलाई के मध्य भाग तक मेरूदण्ड के नियन्त्रण बिंदु होते हैं। आधुनिक जीवन में आम हो चुकी मेरूदण्ड की समस्या का इन बिंदुओं के प्रयो्ग से निदान किया जा सकता है।

6. कान और आँख के बिंदुओं के नीचे मध्य में फेफडों का क्षेत्र होता है। श्वास और फेफडों संबंधी व्याधियाँ इस बिंदु पर उपचार किये जाने से ठीक हो जाती हैं।

.शरीर में कौन सी बीमारियाँ विकसित हो रहीं हैं या विद्यमान हैं यह पता लगाने का प्रभावी तरीका भी एक्युप्रेशर के पास उपलब्ध है। हाथ या पाँव के सभी क्षेत्रों को दबा कर देखें, यदि किसी हिस्से में असामान्य दर्द है तो वही हिस्सा रोगग्रस्त भी होगा। खास बात यह है कि उस हिस्से का उपचार भी आप उसी हिस्से को दबा कर कर सकते हैं।

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