18.12.07

प्रेम

प्रेम के साथ सबसे बडी् समस्या यह है कि यह जिसके साथ है उसे बाँधने की कोशिशें प्रारम्भ हो जाती हैं। परंतु सत्य यह है कि किसी को भी इस प्रकार आप बॉंध पायें यह संभव ही नहीं होता। प्रसिद्ध कहावत है कि यदि आप किसी से प्रेम करते हैं, तो उसे स्वतंत्र छोड़ दीजिए। अगर वह आपका है तो आपके पास वापस आ जाएगा, और यदि वह नहीं आता तो वह आपका कभी था ही नहीं। परन्तु समस्या यह होती है कि हम उसे यह मौका देते ही नहीं कि वह हमसे बाहर भी कुछ सोच सके। एकमेव अधिकार ही हमारी प्र‍वृत्ति बन जाती है। यही प्रेम के प्रति हमारे आकर्षण को धीरे-धीरे कम और फिर समाप्त करने लगती है। प्रसिद्ध कहावत भी है कि जिस भी चीज को जान लिया जाए उसके प्रति हमारा विक्षिप्त आकर्षण फिर कम होने लगता है। यानी ज्ञान की पूर्णता लक्ष्य ज्ञान के प्रति अरुचि उत्पन्न करती है। प्रेम के बारे में एक और भी महत्वपूर्ण विषय है कि प्रेमी पहले आकर्षण, फिर सहज, फिर अन्त में आदत बन कर रह जाता है। प्रेम की कोमल भावनाएँ समाप्त प्राय हो जाती हैं। तो क्या प्रेम के आनन्‍द को आजीवन महसूस करना संभव नहीं। है! बस प्रेम में नवीनता बनाये रखिये। उसे आदत न बनने दें। ध्यान रखें प्रयत्न उसे नीरस होने से बचा लेते हैं। उसे वैसे प्रयत्न देते रहिये जो आप उसे उसकी नवीनता में समर्पित किया करते थे। प्रेम आपको सबसे मूल्यवान अनुभव देने में सहज समर्थ होगा। प्रेममयी शुभकामनाओं के साथ..... गौरव ।

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